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और अब हमारे पास औलाक, जिसे वियतनाम भी कहते हैं, के ख़ान क़ुइन से औलासी (वियतनामी) भाषा में एक दिल की बात है, जिसमें कई भाषाओं में उपशीर्षक उपलब्ध हैं:प्रिय परमेश्वर – मेरे प्रिय गुरुवर, स्वर्ग तक मेरा मार्गदर्शन करने हेतु मैं परमेश्वर को तहे दिल से धन्यवाद देती हूँ। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, क्योंकि आपने मुझ पर अनगिनत आशीर्वाद बरसाए हैं। हे ईश्वर, मैं विशेष रूप से आपको प्रेम करती हूँ, क्योंकि आपने मेरे लिए "ओ कुओई (थंग कुओई)" गीत गाया था। उस समय गुरुवर ने पीले रंग का वस्त्र पहन रखा था। आपके बाल सुनहरे थे, और आपके वस्त्र उज्ज्वल प्रकाश से जगमगा रहे थे। जब गुरुवर ने मुझे गले लगाया, तो मैं पूरी तरह से खुशी और आशीर्वाद से भर गई थी।गुरुवर मुझे चंद्रमा की सैर पर भी ले गए। इसके बाद, आप मुझे स्वर्ग के कई स्तरों तक ले गए, जहां चमकदार द्वार और अनगिनत प्रकार के फल थे। किसी खास फल के बारे में सोचने मात्र से ही वह मेरे हाथ में प्रकट हो जाता था, फिर भी मैं इतनी आनंदित थी कि मुझे इन्हें खाने की आवश्यकता भी महसूस नहीं हुई।फिर गुरुवर मुझे मेरी दिवंगत दादी से मिलने ले गए। उनके बाल घने थे - कभी सुनहरे, कभी सफेद - और वह किसी परी की तरह ही सुंदर थी। उन्होंने मुझसे कहा कि गुरुवर और संतों और मुनियों को हमेशा याद रखना। जहां वह रहती थी, वहां बहुत सारे लोग थे, सभी जवान और सुंदर थे।एक बार गुरुवर ने मुझसे पूछा कि क्या मैं सुप्रीम मास्टर टेलीविजन देखती हूँ। मैंने जवाब दिया, "नहीं, गुरुवर।" फिर आपने मुझे इसे और अधिक देखने की सलाह दी, ताकि आप मुझे उच्चतर लोकों की ओर ले जा सकें। जब मैंने गुरुवर के साथ यात्रा की थी, तो मैंने सोने से सुसज्जित सफेद वस्त्र पहन रखा था, मेरे सिर पर एक ताज था, और मेरे सुनहरे पंख थे और सुंदर पैर थे। मेरी यही कामना थी कि एक दिन मुझे गुरुवर से दोबारा मिलने का अवसर मिले।मेरे गुरुवर मुझे अंतरिक्ष यान से यात्रा पर भी ले गए। सबसे पहले, आपने मुझे स्वर्ग के उच्चतम स्तर तक ले गए, जहां हीरे, बहुमूल्य रत्नों और सोने से बने भव्य महल थे। वहाँ मेरी मुलाकात प्रभु यीशु और संत मरियम से भी हुई। उन दरबारों के अंदर मेरे गुरुवर की अनगिनत तस्वीरें थीं - इतनी अधिक कि मैं उन सभी को गिन भी नहीं सकती थी।फिर, गुरुवर ने मेरा हाथ पकड़ा और हम एक अंतरिक्ष यान में बैठकर चंद्रमा की यात्रा पर निकल पड़े। वहां का नजारा खूबसूरत था और हवा ताजी थी। मैं चंद्रमा के राजा से मिली, और जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, मेरे गुरुवर मुझे सूर्य के राजा से मिलवाने ले गए। वह बहुत दयालु थे और उन्होंने मुझे चाय और केक पेश किया। क्योंकि बाहर बहुत गर्मी थी, इसलिए गुरुवर ने मुझे गर्मी प्रतिरोधी कवच की दो परतों से सुरक्षित किया।अंत में, गुरुवर मुझे एक चमकदार सुनहरे कवच से ढके अंतरिक्ष यान में बिठाकर नरक का भ्रमण कराने ले गए। मैं बहुत भयभीत थी, क्योंकि वहां बहुत सी चीखें थीं और बहुत सी आत्माएं दंड भोग रही थीं। लेकिन गुरुवर ने कहा, "डरो मत, मैं यहाँ हूँ।" आपने कुछ लोगों को बचाया और उन्हें स्वर्ग में ले आए। वापस लौटने पर मैंने गुरुवर को गले लगाया और कहा, "मुझे उम्मीद है कि अगली बार आपसे फिर मुलाकात होगी।" औलाक (वियतनाम) से ख़ान क़ुइनमासूम ख़ान क़ुइन, हमारे प्रिय गुरुवर के साथ अपने अद्भुत आंतरिक दर्शन साझा करने के लिए धन्यवाद। गुरुवर आपको यह प्यारा संदेश भेजतें है:"स्नेही ख़ान क़ुइन, जब हमारे हृदय शुद्ध होते हैं, तो आंतरिक गुरुवर हमारे साथ जो चमत्कार साझा करते हैं, उनकी कोई सीमा नहीं होती। यह बहुत ही अद्भुत है कि आपने मेरे साथ स्वर्ग के अनेक स्तरों की यात्रा करते हुए इतनी शानदार आंतरिक यात्राओं का अनुभव किया है। प्रत्येक गुरुवर अपने शिष्यों के साथ स्वर्ग की सर्वोत्तम चीजें साझा करना चाहते हैं, लेकिन शिष्यों के हृदय में सच में वह भावना होनी चाहिए ताकि उनकी ऊर्जा उस दिशा के अनुरूप हो जहां गुरुवर उन्हें ले जाना चाहते हैं। हमारी सीमाएं केवल हमारे अपने मन और हृदय में निहित बातों से ही निर्धारित होती हैं। परमेश्वर के लिए कोई सीमा नहीं है। आशा है कि सभी लोग जल्द से जल्द इस बात को समझ लें और वे परमेश्वर को उन्हें भीतर से जागृत करने की अनुमती दें ताकि वे अपने असीम ईश्वरिय स्वरूप का अनुभव कर सकें और जीवित रहते ही स्वर्ग के आनंद का अनुभव कर सकें। जब ऐसा होगा, तब यह वास्तव में एक अद्भुत दुनिया होगी। कामना है कि आप और जादुई औलाक (वियतनाम) को परमेश्वर के अनंत, सदा प्रवाहित होने वाले उपहार प्राप्त हों और आप सच्चे आध्यात्मिक जीवन की भव्यता का आनंद लें। मेरा प्रेम जीवन के हर पल में आपका मार्गदर्शक प्रकाश है।"











